Posted by: santoshjalanpink | अगस्त 16, 2009
आराधना :
सारी दुनिया से हार भगवन आया तुम्हरे द्वार नैया पार लगाओ जी
तेरा सहारा न मिले तो जीवन है बेकार
तेरी सीतल छाव में हमें मिलती है फुहार
इस मंद मंद अहसास में मेरा मन करता उलहास
मन के सुने आँगन में तुम अब कर लो अपना निवास
जीवन सफल बनाये जी
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